महाभारत काल के ये थे 5 सबसे शक्तिशाली और खतरनाक योद्धा, पहला नाम जानकर चौक जायेंगे



महाभारत काल के ये थे 5 सबसे शक्तिशाली और खतरनाक योद्धा, पहला नाम जानकर चौक जायेंगे

सबसे बड़ा और खतरनाक युद्ध अगर किसी को माना जाता है तो वहं प्राचीन महाभारत युद्ध को माना जाता है जिसमें लाखों योद्धाओं ने भाग लिया था कहा जाता है कि इस युद्ध में ऐसे शक्तिशाली योद्धाओं ने भाग लिया था जो अपराजय थे और यहां तक कि इन योद्धाओं के पास ऐसे ऐसे शक्तिशाली और खतरनाक अस्त्र शस्त्र थे जिसके कारण पूरी पृथ्वी नष्ट भी हो सकती थी परंतु क्या आप लोग जानते हैं कि महाभारत काल के पांच सबसे शक्तिशाली योद्धा कौन थे तो आइए जानते हैं आज की इस Video में महाभारत काल के पांच सबसे शक्तिशाली योद्धा कौन कौन थे

अर्जुन :

मित्रों महाभारत काल का अर्जुन पांचवा सबसे शक्तिशाली योद्धा माना जाता है। कहा जाता है कि जब अर्जुन और दुर्योधन भगवान श्री कृष्ण के सनमक्ष महाभारत युद्ध की सहायता के लिए पहुंचे थे तब अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण की नारायणी सेना को ना मांगते हुए सिर्फ भगवान श्री कृष्ण को मांगा था। और यह महाभारत काल का सबसे बड़ा निर्णय माना जाता है। क्योंकि इस युद्ध में भगवान श्री कृष्ण के कारण ही पांडवों ने कौरवों की सेना को धूल चटा दी थी, महाभारत युद्ध में अर्जुन कई सारे शक्तिशाली अस्त्र और शस्त्र से संपन्न थे, और इन्हीं शक्तिशाली अस्त्र और शस्त्र के कारण ही अर्जुन ने गौरव की आधी से अधिक सेना को मार दिया था और इसमें भीष्म पितामह और करण जेसे युद्ध शामिल थे

द्रोणाचार्य :

द्रोणाचार्य एक ऐसे योद्धा थे जिन्होंने कौरव और पांडवों को दोनों को युद्ध की शिक्षा दी थी, और यहां तक कि द्रोणाचार्य को महाभारत काल का चौथा सबसे शक्तिशाली और खतरनाक योद्धा माना जाता है। द्रोणाचार्य इस प्रकार के योद्धा माने जाते थे कि जिनके पास नारायणास्त्र ब्रह्मास्त्र जैसे शक्तिशाली अस्त्र और शस्त्र मौजूद थे, परंतु मित्रों जब धर्म और अधर्म का युद्ध का समय आया तब द्रोणाचार्य ने अधर्म के पक्ष में युद्ध लड़ना स्वीकार किया, क्योंकि उनकी मजबूरी थी, परंतु द्रोणाचार्य को इस प्रकार नहीं मारा जा सकता था इसके लिए भगवान श्री कृष्ण को एक कूटनीति का उपाय करना पड़ा, भीम के हाथों एक अश्वत्थामा नामक हाथी को मरवा दिया और चारों और यह सनसनी फैला दी कि अश्वत्थामा मारा गया जिस कारण वर्ष द्रोणाचार्य ने अपने शस्त्र त्याग दिए जिसका अवसर उठाते हुऐ धृष्टद्युम्न ने द्रोणाचार्य का सिर धड़ से अलग कर दिया, वैसे द्रोणाचार्य को मारना इतना आसान नहीं था

कर्ण :

मित्रों कर्ण महाभारत काल का तीसरा सबसे शक्तिशाली योद्धा माना जाता है कर्ण को इस प्रकार का योद्धा माना जाता है कि जब तक कर्ण ने कवच और कुंडल धारण किया हुआ है तब तक कर्ण को पराजित करना संभव नहीं है। कर्ण एक बड़ा शक्तिशाली योद्धा होने के साथ एक बहुत बड़ा दानवीर भी था। जिस कारण वर्ष आज भी करण का नाम सम्मान से लिया जाता है। आपको बता दें कि जिस समय महाभारत युद्ध चल रहा था। तब अर्जुन के पिता देवराज इंद्र करण के समक्ष एक ब्राह्मण बनकर पहुंचे थे और कर्ण को उनके कवच और कुंडल दान के रुप में मांगे थे। तत्पश्चात कर्ण ने अपने जीवन की चिंता ना किए हुए कवच और कुंडल को दान के रुप में देवराज इंद्र को दे दिए थे, मित्रों कहा जाता है कि जब महाभारत युद्ध चल रहा था। तब कर्ण के रथ का एक पहिया धरती में फस गया था जिस कारण वर्ष अर्जुन ने इस का अवसर उठाते हुए कर्ण का वध कर दिया था, वैसे कर्ण को हराना संभव नहीं है।

भीष्म पितामह :

महाभारत काल के भीष्म पितामह सबसे शक्तिशाली और महान योद्धा थे। मित्रों कहा जाता है कि भीष्म पितामह को एक वरदान प्राप्त हुआ था कि उनकी मृत्यु उनकी इच्छा के अनुसार होगी, भीष्म पितामह एक ऐसे योद्धा थे जिनके पास कई शक्तिशाली अस्त्र और शस्त्र थे, और यहां तक कि उनको महाभारत काल के युद्ध में हरा पाना असंभव नही था, और यहां तक कि भीष्म पितामह ने अपने गुरु परशुराम को भी युद्ध में हरा दिया था, तब भीष्म पितामह ने पूरे 10 दिन तक पांडवों की सेना का सर्वनाश कर दिया था, तब सभी पांडवों को लगा कि भीष्म पितामह के रहते वह इस युद्ध को कभी भी जीत नहीं सकते, तत्पश्चात उन्होंने एक चलाई और शिखंडी को अर्जुन के रथ पर खड़ा कर दिया जिस कारण वर्ष भीष्म पितामह ने अपने शस्त्र को त्याग दिए, और उसका अवसर उठाते हुए अर्जुन ने भीष्म पितामह के शरीर को अपने बाणों से भेद दिया, हालांकि भीष्म पितामह को हराना संभव नहीं है। 

श्री कृष्ण :

मित्रों महाभारत काल के समय सबसे शक्तिशाली योद्धा अगर किसीको माना जाता है। तो वो है भगवान श्री कृष्ण, मित्रों यहां पर आपको बता दें कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार माने जाते हैं। और इसी कुरुक्षेत्र की भूमि पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दे भी दिया था, जो आज के समय में भी अत्यंत महत्वपूर्ण और आवश्यक है। मित्रों यह भी कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध के समय किसी भी शस्त्र का प्रयोग नहीं किया था भगवान श्री कृष्ण की कूटनीति और रणनीति के कारण ही पांडवों को जीत दिलाई थी, और कौरव को महाभारत के युद्ध में हरा दिया था, अगर भगवान श्री कृष्ण ने यदि महाभारत युद्ध में शस्त्र उठा लिया होता तो वह पूरे कौरव का सर्वनाश अकेले ही कर दिया होता, महाभारत में श्री कृष्ण ने अर्जुन को अपना विराट स्वरूप भी दिखाया था

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